इसके मुख्य कारण आमतौर पर ये होते हैं: The main reasons for this are usually:
1. आर्थिक मंदी (Recession) का डर
अगर लगने लगे कि देश की इकोनॉमी कमजोर हो रही है, बेरोजगारी बढ़ रही है, या कंपनियों का मुनाफा घटेगा, तो निवेशक घबराकर शेयर बेचने लगते हैं।
· उदाहरण: 2008 में अमेरिका में सब-प्राइम लोन संकट के कारण दुनियाभर के बाजार क्रैश हो गए थे।
2. बुलबुला फूटना (Bubble Burst)
कभी-कभी शेयरों के दाम उनके वास्तविक मूल्य से कहीं ज्यादा बढ़ जाते हैं (बुलबुला)। जैसे ही यह बुलबुला फूटता है, कीमतें धड़ाम से गिर जाती हैं।
· उदाहरण: डॉट-कॉम बबल (2000) जब टेक कंपनियों के शेयर बिना मुनाफे के ही बहुत ऊंचे चले गए थे।
3. बड़ी घटनाएं (Black Swan Events)
ऐसी अचानक आई आपदाएं जिनका अंदाजा नहीं लगाया जा सकता।
· उदाहरण: कोविड-19 महामारी (2020) जब बाजार सपाट हो गया था, या कोई बड़ा युद्ध (जैसे रूस-यूक्रेन)।
4. डर और अफवाहें (Fear & Panic)
अक्सर क्रैश की वजह सिर्फ डर होता है। अगर किसी बड़े निवेशक ने शेयर बेचे, तो छोटे निवेशक यह सोचकर बेचना शुरू कर देते हैं कि "कुछ बुरा होने वाला है"। इस हड़बड़ी को पैनिक सेलिंग (Panic Selling) कहते हैं।
5. भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tension)
दो देशों के बीच युद्ध या व्यापारिक तनाव (Trade War) से कच्चे माल की कीमतें बढ़ जाती हैं, जिससे कंपनियों को नुकसान होता है और बाजार गिरता है।
6. करेंसी या ब्याज दरों में बदलाव- Changes in currency or interest rates
अगर किसी देश का रुपया (करेंसी) बहुत कमजोर हो जाए या RBI ब्याज दरें (Interest Rate) अचानक बढ़ा दे, तो बाजार में नकदी कम हो जाती है और शेयर गिरते हैं।
Stock Market Crash क्या आप जानते हैं?
भारत में सबसे बड़ा क्रैच साल 2008 में आया था, जब सेंसेक्स एक साल में करीब 50% से ज्यादा गिर गया था। हालांकि, क्रैश के बाद ही अक्सर निवेश के सबसे अच्छे मौके भी बनते हैं!
क्या आप जानना चाहेंगे कि "क्रैश के समय एक निवेशक को क्या करना चाहिए?"
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